राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल कैंपस जल्द ही सौर उर्जा से जगमगाएगा।">

आरजीपीवी कैंपस में लगेगा सौर तापी ऊर्जा संयंत्र

भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल कैंपस जल्द ही सौर उर्जा से जगमगाएगा। विश्वविद्यालय कैंपस में सौर तापी ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की जा रही है। सौर ऊर्जा की उन्नत तकनीक क्रासलिनियर कंसनट्रेटेड सोलर पॉवर पर आधारित इस 30 किलोवाट के संयंत्र से 600 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की ऊर्जा पैदा की जाएगी।

आरजीपीवी द्वारा इस संयंत्र की स्थापना टोक्यो इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जापान, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा बर्गन समूह द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। इस संयंत्र का काम अप्रैल माह से शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए  टोक्यो इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तथा रीको इंजीनियरिंग कारपोरेशन के प्रोफेसर व विशेषज्ञों का दल आरजीपीवी का दौरा कर चुका है।

अभी डिजाइन पर चल रहा काम
आरजीपीवी कुलपति प्रो.पीयूष त्रिवेदी का कहना है कि फिलहाल संयंत्र की डिजाइन पर काम चल रहा है। इस संयंत्र की स्थापना व संयुक्त प्रयोगों के बाद एक मेगावाट का विद्युत संयंत्र विवि परिसर में स्थापित किया जाएगा जिसका लाभ विवि के साथ ही समाज को भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस प्रयोग का उद्देश्य ऊर्जा के लिए कोयले के उपयोग को रोकना है।

यह होगा फायदा
वहीं यूआईटी आरजीपीवी निदेशक प्रो.वीके सेठी ने बताया कि क्रासलिनियर कन्सनट्रेटेड सोलर पावर द्वारा बिजली उत्पादन हेतु कोयले पर निर्भरता बहुत सीमा तक कम की जा सकती है, क्योंकि इस तकनीकी में कोयले के स्थान पर सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। यदि इस उन्न्त तकनीकी का उपयोग सम्पूर्ण भारत में होता है तो लगभग 10 प्रतिशत कोयले की बचत के साथ-साथ लगभग 1000 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष की बचत होगी। साथ ही यह जलवायु परिवर्तन के विरुद्व एक सार्थक कदम होगा। देश में प्रथम बार इस तकनीकी का प्रयोग कर विद्युत केंद्र की स्थापना के साथ-साथ विश्वविद्यालय के छात्र इस तकनीकी के अंतर्गत शोध कार्य, प्रशिक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता हेतु कार्य करेंगे।
 

 
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