विदेश में उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी की फैलोशिप छोड़ रहे छात्र

नई दिल्ली। विदेश में उच्च शिक्षा और सरकारी संस्थानों में परमानेंट नौकरी के लिए छात्र सीएसआईआर-यूजीसी की फैलोशिप छोड़ रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा छात्र विज्ञान संकायों के हैं। यह खुलासा खुद काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के जुड़े शोधार्थियों ने किया है।
 
फरवरी 2013 के 'करंट साइंस" में प्रकाशित शोधपत्र में शोधार्थियों ने जो निष्कर्ष निकाला है वो विज्ञान विषयों में छात्रों की तेजी से घटती रुचि को दर्शा रहा है। 'आर सीएसआईआर-यूजीसी नेट क्वालीफाइड जूनियर रिसर्च फैलोज गोइंग अवे फ्राम साइंस ?' विषय पर प्रकाशित इस शोधपत्र के लेखक एसए हसन, सुशीला खिलनानी व राजेश लूथरा हैं। सभी लेखक सीएसआईआर में मानव संसाधन विकास समूह से जुड़े हुए हैं। इस लेख के लिए शोधार्थियों ने विज्ञान के पांच संकायों के उन छात्रों पर सर्वे किया जिन्होंने  दिसंबर 2008 से जून 2010 के बीच काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण की थी लेकिन फैलोशिप का फायदा नहीं उठाया।
 
41 फीसदी ने फैलोशिप छोड़ दी
रिसर्च पेपर के अनुसार  दिसंबर 2008 से जून 2010 के बीच  केमिकल साइंस, अर्थ साइंस, लाइफ साइंस, मैथमेटिकल साइंस तथा फिजिकल साइंस संकाय के लिए करीब 6096 को जेआरएफ अवार्ड की गई थी। इसमें से केवल 3579 ने ही फैलोशिप का फायदा उठाया जबकि 2517 ने छोड़ दिया। मतलब कुल 6096 में से 41 फीसदी उम्मीदवारों ने फैलोशिप छोड़ दी। शोधार्थियों ने फैलोशिप छोड़ने वाले इन 2517 उम्मीदवारों से सर्वे के दौरान जब इसकी वजह पूछी तो इनमें से कुल 844 (34%) प्रतिशत ने अपना जवाब दिया। फैलोशिप छोड़ने की सबसे प्रमुख वजह दूसरी एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली फैलोशिप मिलना सामने आया। कुल 844 में करीब 27 प्रतिशत ने अन्य एजेंसियों की फैलोशिप मिलने के कारण छोड़ना स्वीकारा। जबकि 20 प्रतिशत ने सरकारी व निजी संस्थानों में नियमित नौकरी लगना वजह बतायी। वहीं 19 फीसदी ने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के लिए फैलोशिप छोड़ने की बात कही। केवल 6 प्रतिशत ने गैर वैज्ञानिक संस्थानों में नौकरी लगने की बात स्वीकारी।
 
केमिकल साइंस  के सबसे ज़्यादा
जवाब देने वाले इन 844 उम्मीदवारों में से 213 केमिकल साइंस, 60 अर्थ साइंस, 285 लाइफ साइंस, 148 मैथमेटिकल साइंस तथा 138 फिजिकल साइंस संकाय के थे। पेपर के अनुसार दिसंबर 2008 में विषयवार कुल 1787 फैलोशिप अवार्ड की गई लेकिन इनमे से 647 ने इसका फायदा नहीं उठाया। इसी तरह जून 2009 में कुल 1689 में से 676, दिसंबर 2009 में 1393 में से 627 तथा जून 2010 में 1227 में से 567 ने फैलोशिप नहीं ली। 
 
एमएससी में नामांकन बढ़ा
शोध में एक और दिलचस्प बात यह सामने आयी है कि सत्र 2004-05 से लेकर 2009-10 तक विज्ञान स्नातकोत्तर (एमएससी) में नामांकन कराने वालों की संख्या में हर साल इजाफा हुआ है। यही वजह है कि यूजीसी नेट देने वालों की भी संख्या वर्षवार तेजी से बढ़ी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सत्र 2011-12 में कुल 4274 फैलोशिप अवार्ड की गई थी।

साल में दो बार होती है नेट
गौरतलब है कि काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) ने 1983 में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के माध्यम से युवा वैज्ञानिकों को खोजने के लिए रिसर्च फैलोशिप योजना शुरू की थी। बाद में 1986 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से नेट उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फैलोशिप अवार्ड की जाने लगी। उसके बाद 1989 में नेट उम्मीदवारों को लेक्चररशिप के लिए भी पात्रता दी जाने लगी और इसका नाम बदलकर सीएसआईआर-यूजीसी नेट परीक्षा कर दिया गया। नेट साल में दो बार जून व दिसंबर माह में आयोजित की जाती है।
 


यह है फैलोशिप छोड़ने की प्रमुख वजह
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-उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना
-यूनिवर्सिटीज व कॉलेजों में नौकरी लगना
-अन्य एजेंसियों की फैलोशिप मिलना
-सरकारी संस्थानों में नियमित व संविदा नियुक्ति होना
-गैर वैज्ञानिक संस्थानों में नौकरी लगना
-दूसरी बार नेट देकर ज्वाइन करना
-व्यक्तिगत, स्वास्थ्य व पारिवारिक कारण
-पीएचडी आदि में रुचि नहीं होना
-स्कूलों में टीचिंग से जुड़ना
-अच्छी प्रयोगशाला नहीं मिलना
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वर्षवार एमएससी मे नामांकन
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वर्ष                नामांकन
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2004-05    198719
2005-06    219,285
2006-07    249071
2007-08    388542
2008-09    382619
2009-10    439725
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