भारतीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए लुभा रहा जर्मनी

बर्लिन। भारतीय छात्रों का उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी सबसे पसंदीदा देश बन गया है। पिछले कुछ सालों में पढ़ाई के लिए जर्मनी जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह विश्वविद्यालयों का अंतर्राष्ट्रीयकरण, कम फीस तथा छात्रों को काम करने संबंधी नियम में राहत है।
यहां तक की ब्रिटिश काउंसिल ने भी स्वीकार किया है कि जर्मनी में उच्च शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण इस समय किसी भी अन्य देश के मुकाबले ज्यादा तेजी से हुआ है। जर्मनी में करीब 370 के आसपास विश्वविद्यालय हैं। जर्मन एकेडेमिक एक्सचेंज सर्विस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सत्र 2011-12 में करीब 6 हजार छात्रों ने नामांकन कराया था। जो सत्र 2010-11 के मुकाबले 19 प्रतिशत अधिक था। सत्र 2010-11 में नामांकन कराने वाले छात्रों की संख्या करीब 5 हजार के आसपास थी। 2008 के मुकाबले यह संख्या करीब 70 फीसदी अधिक है।
 
जर्मन एकेडेमिक एक्सचेंज सर्विस की डॉयरेक्टर क्रिस्ट्रीन स्लॉटमन के अनुसार कई छात्र यूरोप यहां तक की एशिया में उच्च शिक्षा के लिए नई जगह तलाश रहे हैं। पहले  वीजा नियम, स्नातक के बाद रोजगार की कम संभावना तथा सामाजिक भय के कारण छात्र नई जगह जाने में थोड़ा डरते थे। लेकिन इससे अलग जर्मनी ने अपने आवास संबंधी नियमों में बदलाव किया है ताकि विदेशी छात्रों को रहने में कोई परेशानी न हो तथा स्नातक के बाद छात्रों, वैज्ञानिकों व शोधार्थियों को जर्मनी में पर्मानेंट आवास की सुविधा मिल सके। इसके लिए नया ब्ल्यू कार्ड जारी किया गया है। इसके अलावा स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई तथा पार्ट टाइम काम से संबंधित उन नियमों में भी बदलाव किया गया जिसके बल पर अब तक ब्रिटेन विदेशी छात्रों को लुभाता आ रहा है।

कम फीस और ज्यादा स्कॉलरशिप 
जर्मन एकेडेमिक एक्सचेंज सर्विस के मुताबिक जर्मनी के विश्वविद्यालय काफी कम फीस ले रहे हैं (करीब 500 यूरो एक टर्म के) तथा छात्रों को बड़ी संख्या में स्कॉलरशिप भी दे रहे हैं। करीब 15 से 20 प्रतिशत भारतीय छात्रों को जर्मनी में हर साल बड़ी संख्या में स्कॉलरशिप मिल रही है। वर्ष 2010 में ही जर्मनी में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों को करीब 1,300 स्कॉलरशिप दी गई। इस समय जर्मनी के लिए भारत 11 वां सोर्स मार्केट तथा स्नातकोत्तर की पढ़ाई में दूसरा प्रमुख देश बन गया है।

सरल वीजा नियम

उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी के पसंदीदा देश बनने के पीछे एक बड़ी वजह ब्रिटेन के नए वीजा नियम भी है। यही वजह है कि जानकार लोग भारतीय छात्रों को ब्रिटेन के बजाए जर्मनी जाने की सलाह दे रहे हैं। पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में खासी गिरावट आयी है। यही वजह है कि हाल ही में भारत की यात्रा पर आए ब्रिटेन के प्रधान मंत्री डेविड कैमरन को भारतीय छात्रों को एक दिन में ही वीजा देने की घोषणा करनी पड़ी थी।

भाषा की परेशानी दूर हुई
हालांकि इन सबके बावजूद जर्मनी को अभी भी एशियाई  मार्केट से कई रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 6, 200 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक फ्रांस के बाद जर्मनी ऐसा दूसरा देश हैं जहां एशियाई छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है। इसके अलावा भाषा व पोस्ट स्टडी की कम जानकारी भी अवरोध की बड़ी वजह है। खासकर दक्षिण एशियाई देशों के छात्रों को जर्मन भाषा नहीं आने के कारण जर्मनी में ही रोजगार तलाशने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भाषा से संबंधित आ रही परेशानियों का तोड़ निकालते हुए जर्मनी ने करीब 600 मास्टर डिग्री प्रोग्राम अंग्रेजी भाषा में शुरू किए हैं जो हॉलैंड के बाद यूरोप में सबसे ज्यादा हैं।
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