संस्कृत आमजन की भाषा क्यों नहीं बनी खोजें विद्वान : मुख्यमंत्री

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संस्कृत के आमजन की भाषा नहीं बन सक पाने और केवल विद्वानों तक ही सीमित रह जाने के कारणों की पड़ताल की जरूरत बताई है। उन्होंने संस्कृत के विद्वानों से अपेक्षा की कि संस्कृत के आम भारतीय की भाषा न बन पाने के कारणों का गहराई से विश्लेषण करें। उन्होंने कहा कि विद्वानों को संस्कृत को आम जनता की भाषा बनाने के उपाय तलाशने होंगे।

श्री चौहान शुक्रवार को उज्जैन के दशहरा मैदान में तीन दिवसीय संस्कृत साहित्योत्सव के शुभारम्भ अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर  मुख्यमंत्री ने संस्कृत साहित्योत्सव में संस्कृत के अध्ययन और अध्यापन के महत्व को रेखांकित करते हुए इसी वर्ष 12 हजार संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति करने की घोषणा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कदम से संस्कृत के महान् ग्रंथों का पठन-पाठन लोकप्रिय होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विद्वत्जन द्वारा खोजे गये मार्ग पर चलकर हम इस लक्ष्य तक पहुँचने का प्रयास करेंगे।
प्रतिभा को कुंठित कर रही अंग्रेजी
पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित करने के लिये कुछ विनम्र प्रयास किये हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के ज्ञान का अभाव ग्रामीण अंचलों के बच्चों की प्रतिभा को कुंठित कर देता है। राज्य सरकार इस स्थिति को बदलने के लिये संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि हिन्दी विश्वविद्यालय में अभियांत्रिकी, चिकित्सा और विज्ञान आदि सभी विषय हिन्दी में पढ़ाये जायेंगे।
 
सारी भाषाओं की जननी
श्री चौहान ने आगे कहा कि संस्कृत दुनिया की सारी भाषाओं की जननी है और अपने आप में एक अद्वितीय भाषा है। तमिल को छोड़कर भारत की सभी भाषाओं में संस्कृत के ऐसे शब्द पाये जाते हैं, जिन्हें आसानी से पहचाना और समझा जा सकता है। श्री चौहान ने कहा कि संस्कृत भाषा में ज्ञान का विशाल भण्डार छिपा हुआ है। विभिन्न संस्कृत ग्रंथों में कई ऐसे तथ्य हैं, जो अब तक उद्घाटित नहीं हो सके हैं।
 
योजना तैयार होगी
वहीं कार्यक्रम के अध्यक्ष जनसम्पर्क एवं संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने कहा कि उज्जेयिनी में यह संस्कृत साहित्योत्सव विश्व में अपनी तरह का पहला आयोजन है। उन्होंने कहा कि साहित्योत्सव में संस्कृत भाषा के उत्थान के लिये मूर्धन्य विद्वानों के मार्गदर्शन में योजना तैयार होगी।
 
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