डॉ. विजय अग्रवाल

राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षक एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) भोपाल ने पिछले कुछ समय में तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में कई कदम महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट में नए कोर्स शुरू करने के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में अपनी तरफ से पहल की है। भविष्य में एनआईटीटीटीआर भोपाल कुछ नई योजनाएं लेकर आ रहा है। इन्हीं योजनाओं और आने वाली समस्याओं को लेकर संस्थान के निदेशक प्रो.विजय अग्रवाल ने एजुकेशन हेराल्ड से कुछ बातें साझा की। पेश है चर्चा के कुछ अंश-

ईएच: इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जिस क्वालिटी के इंजीनियरिंग स्नातक निकलने चाहिए वो नहीं निकल पा रहे हैं। क्या आपको लगता है कि इसमें कहीं न कहीं शिक्षक भी जिम्मेदार हैं ?

प्रो.विजय अग्रवाल: यह बात सही है कि इस समय क्वालिटी के इंजीनियरिंग स्नातक निकल नहीं पा रहे हैं। दरअसल इंजीनियरिंग विषयों के शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और सिलेबस दोनों ही पुराने हो गये हैं। देखने में आ रहा है कि शिक्षक जिस तरीके से पढ़ा रहे हैं उसमें रचनात्मकता की काफी कमी है। इसके कारण छात्र भी पढ़ने के बजाए क्लास बंक करते हैं। हालांकि इसमें अभिभावकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने की जरूरत है। शिक्षकों को कोशिश करनी चाहिए कि छात्र का ज्यादा से ज्यादा समय वर्कशॉप व प्रयोगशाला में बीते। वहीं सिलेबस की बात करें तो अधिकांश विषयों का सिलेबस 20 साल पुराना हो चुका है और इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा नहीं करता है। इसे सुधारने की काफी आवश्यकता है।

ईएच: इंजीनियरिंग टीचर्स खासकर जो नए आ रहे हैं उनमें क्या कमी नजर आती है ? क्या निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के भी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ?

प्रो.विजय अग्रवाल : यहां एक परेशानी की बात यह है कि जो अच्छे छात्र हैं वो टीचिंग के क्षेत्र में आना ही नहीं चाहते हैं। अच्छे एकेडेमिक रिकार्ड वाले छात्रों को टीचिंग की तरफ आकर्षित करने के लिए मंथन करने की जरूरत है। जो टीचिंग में आ रहे हैं उनकी स्किल्स को निखारना एक बड़ी चुनौती है। पहले तो एनआईटीटीटीआर नियमित सरकारी शिक्षकों को ही प्रशिक्षित करते थे लेकिन अब गेस्ट फैकल्टीज को भी प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। इसकी वजह केवल शिक्षण कार्य में गुणवत्ता लाना है ताकि उन्हें इसका फायदा भविष्य में मिल सके। पहले संस्थान में सरकारी कॉलेजों के शिक्षक ही ट्रेनिंग के लिए आते थे अब धीरे-धीरे निजी इंजीनियरिंग कॉलेज भी अपने शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए भेजने लगे हैं। दरअसल निजी कॉलेज संचालक समझ गए हैं कि गुणवत्ता से ही वे आगे चल पाएंगे। सत्र 2013-14 में एनआईटीटीटीआर ने करीब 5 हजार टेक्नीकल टीचर्स को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है। जबकि आईसीटी के माध्यम से 15 हजार तक टीचर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा।

ईएच: अकसर तकनीकी शिक्षा का सिलेबस बदलने और इसे इंडस्ट्री के हिसाब से डिजाइन करने की बात उठती रहती है। इस दिशा में एनआईटीटीटीआर अपनी तरफ से क्या प्रयास कर रहा है और इसमें क्या परेशानी आ रही है ?

प्रो.विजय अग्रवाल:
दरअसल एनआईटीटीटीआर राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेजों का सिलेबस तैयार करने में अपनी भूमिका निभाता है, लेकिन देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) सिलेबस तैयार करवाती है।  यहां परेशानी यह है कि इस काम में एआईसीटीई ने अभी तक एनआईटीटीटीआर को शामिल ही नहीं किया है। इस बारे में पिछले दिनों भोपाल प्रवास कर आए सचिव मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सामने इस बात को रखा गया था।  हालांकि बाद में एआईसीटीई ने एक कमेटी गठित कर सिलेबस तैयार करने में एनआईटीटीटीआर के शिक्षकों को शामिल करने पर सहमति जतायी है।

ईएच: भविष्य के लिए क्या कोई नई योजना या नया कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है ?

प्रो.विजय अग्रवाल:
हां, एनआईटीटीटीआर भोपाल सत्र 2013-14 से फार्मास्युटिकल केमेस्ट्री में तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया में एमएससी कोर्स शुरू करने जा रहा है। इसकी संबद्धता के लिए बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से चर्चा चल रही है। इसके अलावा कम्प्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन नाम से नया एमटेक कोर्स भी शुरू करने जा रहे हैं। यह कोर्स पूरी तरह इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसमें कम्प्यूटर साइंस व एप्लीकेशन के साथ ही इलेक्ट्रानिक्स के कुछ विषय शामिल किए गए हैं। भोपाल धीरे-धीरे फिल्म हब बनते जा रहा है। यहां लगातार फिल्मों की शूटिंग हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रानिक मीडिया विभाग के तहत इलेक्ट्रानिक मीडिया में एमएससी कोर्स शुरू किया जा रहा है, जिमसें छात्रों को फिल्म संपादन, पटकथा लेखन, वीडियोग्राफी आदि के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा सभी एनआईटीटीटीआर मिलकर पॉलीटेक्निक संस्थानों के लिए विषयवार व्याख्यानों के करीब 400 वीडियो तैयार करने जा रहे हैं। जो एनआईटीटीटीआर जिस विषय में बेहतर होगा उसे उस विषय के व्याख्यान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि विषयवार व्याख्यानों की पुनरावृत्ति न हो।

1
Back to top