हादसे के तीन दशक बाद भी यूनियन कार्बाइड भोपाल के लिए खतरा

भोपाल। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री बंद होने के तीन दशक बाद भी शहरवासियों के लिए खतरा बनी हुई है। पिछले बीस सालों में यूनियन कार्बाइड लिमिटेड (यूसीआईएल) के जहरीले कचरे की जो अलग-अलग पंद्रह अध्ययन रिपोर्ट आयी है उसमें यहां की मिट्टी और भूजल का संक्रमित होना पाया गया है। यूसीआईएल में रखे जहरीले कचरे का दायरा घटने के बजाए लगातार बढ़ता जा रहा है। फिलहाल 14 इलाके इससे प्रभावित हैं।

सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट (सीएसई) ने पहली बार सभी अध्ययन रिपोर्टों का विश्लेषण कर एक जो रिपोर्ट जारी की है वो चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार कचरे के कारण यूसीआईएल के उत्तरी-पूर्व इलाके का भूजल धीरे-धीरे प्रदूषित होता जा रहा है।
 
करीब तीन किलोमीटर तक का इलाके का भूजल पहले ही प्रदूषित हो चुका है। सीएसई के डिप्टी डॉयरेक्टर जनरल चंद्रभूषण के अनुसार भूजल की सबसे ज्यादा खराब स्थिति यूसीआईएल के उत्तर की तरफ से जाने वाली रेलवे लाइन से लगे इलाकों में है।
 
अभी तक हुए अध्ययन के अनुसार जेपी नगर, नवाब कालोनी, शिव शक्ति नगर, ब्ल्यू मून कालोनी, अटल अयूब नगर, अनु नगर, कैंची छोला, आरिफ नगर, प्रेम नगर, नवजीवन कालोनी, गरीब नगर, सुंदर नगर, न्यू आरिफ नगर, शक्ति नगर, प्रीत नगर, शिव नगर व इंदिरा नगर का भूजल सबसे ज्यादा प्रदूषित है।

इन इलाकों में जिंक, मैंगनीज, कॉपर, मरकरी, क्रोमियम, लैड, निकल जैसे हानिकारक भारी धातुओं की मात्रा मानक से अधिक पायी गई है। इसका असर यहां के रहवासियों के स्वास्थ पर पड़ रहा है।
 
चंद्रभूषण का कहना है कि अभी तक जो अध्ययन हुआ है वो तीन किमी के ही दायरे में हुआ है। एक ही दिशा में लगातार बहने के कारण पिछले तीस सालों में भूजल कहां तक पहुंच गया है यह किसी को नहीं मालूम। इसीलिए भूजल प्रदूषण का दायरा दस किमी तक फैलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

अध्ययन के अनुसार 1969 से लेकर 1984 के बीच में आर्थो डाइक्लोरोबेंजिन, कार्बन टेट्रा क्लोराइड, कार्बाइल, कार्बन टेट्रा क्लोराइड, एल्डिकार्ब, नैप्थलीन, आर्थो डाइक्लोरोबेंजिन व अल्फा नैप्थॉल जैसे घातक रसायन प्लांट के भीतर व बाहर स्थित पोखर सोलर इवपोरेशन पोंड (एसईपी) में डाले जाते रहे हैं।
 
प्लांट बंद होने के बाद यह जहरीला कचरा प्लांट और एसईपी में ही छोड़ दिया गया था। सालों से पड़े कचरे के कारण यहां की मिट्टी और भूजल संक्रमित हो गए हैं। हालांकि एसईपी को लेकर अभी तक जो अध्ययन हुआ है उसमें विरोधाभास बना हुआ है। इस पर अभी और अध्ययन करने की जरूरत है।
 
इसके अलावा यहां और भी डंप साइट है। चंद्रभूषण का कहना है कि यूका में 350 टन से ज्यादा कचरा पड़ा हुआ है। लेकिन अभी पूरा ध्यान 350 टन कचरे पर ही होने के कारण बाकी का छूटा हुआ है।


यूसीआईएल के आसपास की मिट्टी में प्रदूषण की स्थिति

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दूषित पदार्थ              मात्रा (पीपीएम में)

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कार्बाइल                      51513
एल्डिकार्ब                    7876
डाइक्लोरोबेंजिन           2049
एचसीएच आइसोमर     99700
अल्फा नैप्थॉल             9914
मरकरी                      128000
लैड                            406
क्रोमियम                    1065
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यूसीआईएल के आसपास भूजल में प्रदूषण की स्थिति
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दूषित पदार्थ                 मात्रा (पीपीबी में)
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कार्बाइल                            28
डाइक्लोरोबेंजिन                 2875
एचसीएच आइसोमर           40
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1969 से 1984 के बीच यूसीआईएल में फेंका गए पदार्थ
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 केमिकल                  मात्रा (मीट्रिक टन)
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कार्बाइल                      50.00
कार्बन टेट्रा क्लोराइड      500.00
एल्डिकार्ब                    2.0
नैप्थलीन                     50.00
आर्थो डाइक्लोरोबेंजिन   500.00
अल्फा नैप्थॉल             50.0
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(यूसीआईएल के पूर्व प्लांट ऑफिसर की रिपोर्ट के अनुसार)


यूसीआईएल में मौजूद बंद कचरा
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वस्तु                                               मात्रा(मीट्रिक टन)
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सेविन व नैप्थॉल के अवशेष                        95
रिएक्टर के अवशेष                                  30
अर्ध संसाधित पेस्टिसाइड्स                       56
खुदाई के लिए जरूरी मिट्टी                      164
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