पांच साल में खत्म हो सकता है यूका का प्रदूषण

भोपाल। यूनियन कार्बाइड लिमिटेड (यूसीआईएल) के आसपास का इलाका अगले पांच साल में पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हो सकता है बशर्ते सरकार विशेषज्ञों के सुझाव से तैयार किया गया एक्शन प्लान अमल में लाए।

सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट (सीएसई) ने पहल करते हुए यूसीआईएल के कचरे पर अध्ययन करने वाले सभी संगठनों के विशेषज्ञों के सुझावों को एकजाई कर रिपोर्ट तैयार की है।

इस एक्शन प्लान में यूसीआईएल के चारों और फेंसिंग लगाने, सोलर इवोपोरेशन पॉण्ड (एसईपी) में निर्माण बंद कराने और बारिश के पानी को यूसीआईएल से बाहर आने रोकने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

सीएसई के डिप्टी डॉयरेक्टर जनरल चंद्रभूषण ने बताया कि 25 - 26  अप्रैल को इस एक्शन प्लान के लिए हुई राउंड टेबर कांफ्रेंस में 26 संगठनों के 30 प्रतिनिधियों व विशेषज्ञों ने भाग लिया था।

इस बैठक में जो उपाए आए हैं उन्हें दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में उन उपायों को शामिल किया गया है जिन पर तत्काल अमल करना है, वहीं दूसरे चरण में मध्य व लंबी अवधि के उपाय बताए गए हैं।

 एक्शन प्लान तैयार करने के लिए सीएसई ने उन सभी संस्थाओं को एक मंच पर लाया है जिन्होंने पिछले बीस सालों के दौरान यूका के कचरे का अध्ययन कर पंद्रह रिपोर्ट तैया
र की है।
 
इनमें आईआईटीआर, नीरी, एनजीआरआई, आईआईसीटी, सीएसई, सीपीसीबी, ग्रीनपीस इंटरनेशनल, फैक्ट फाइंडिंग मिशन एंड सृष्टि, पीपुल्स साइंस इंस्टिट्यूट, स्टेट रिसर्च लैबोरेटरी पीएचईडी मप्र शासन, भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉरमेशन एंड एक्शन तथा यूनियन कार्बाइड लिमिटेड संस्थाएं मुख्य रूप से शामिल थी।

इन सभी संस्थाओं की रिपोर्ट का जो निष्कर्ष था उसका विश्लेषण किया गया है। सभी संस्थानों की रिपोर्ट में प्रदूषण के रिजल्ट अलग-अलग आए हैं लेकिन सभी ने यहां की मिट्टी व भूजल में भारी धातु होना पाया है।

चंद्रभूषण के अनुसार इस बैठक में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि एक छोटी जगह पर पड़ा ३५० टन कचरा पूरे प्लांट में मौजूद कचरे का एक मामूली हिस्सा भर है। सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यहां की मिट्टी और भूजल को संक्रमण से मुक्त करना है।

इस बैठक में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से एक भी प्रतिनिधि के शामिल नहीं होने पर प्रदेश सरकार का इस मुद्दे को लेकर उदासीन होना सामने आया है। चंद्रभूषण के अनुसार इस बैठक में मध्यप्रदेश सरकार का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं था।

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित व गैस राहत विभाग के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया लेकिन वे आश्वासन देने के बावजूद बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ही यूसीआईएल मुद्दे पर सभी लोग चर्चा करने से हिचकिचा रहे हैं।

उन्होंने इस एक्शन प्लान की रिपोर्ट सभी संबंधित विभागों को देने के  साथ ही आंदोलन से जुड़े संगठनों के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत करने की बात कही।


यह सुझाव आए-
- यूसीआईएल को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त कर इसे मेमोरियल व सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर इंडस्ट्रियल डिजास्टर मैनेजमेंट के रूप में विकसित किया जाए
-यूसीआईएल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए समय का निर्धारण किया जाए।
- सारा काम पारदर्शी हो। इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल ऐजेंसी बनाया जाए।
- सोलर इवोपोरेशन पॉण्ड में पड़े जहरीले कचरे को पहचान कर उसे नष्ट करें।
- वेंट, वेंट स्क्रबर, स्टोरेज टैंक और कंट्रोल रूम को संरक्षित किया जाए।
- क्षेत्र में जमा सारे कचरे को बाहर निकालकर इसमें मौजूदा रसायनों को उनकी प्रकृति के अनुसार नष्ट किया जाए।


एक्शन प्लान में आए यह सुझाव और लगने वाला समय
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यूसीआईएल के चारों और फेंसिंग लगायी जाए                     -               तत्काल
सोलर इवोपोरेशन पॉण्ड में निर्माण बंद कराया जाए               -               तत्काल
बारिश के पानी को रोकने के प्रयास होना चाहिए                   -               तीन महिना
पीथमपुर में एचआईएल केरल से आए कचरे का ट्रायल          -               तीन महिना
यूसीआईएल कचरे का कैरेक्टराइजेशन करना                     -               तीन महिना
भूजल का फील्ड इंवेस्टिगेशन व लैब में एनालिसिस              -               एक साल
पूरे सोलर इवोपोरेशन पॉण्ड क्षेत्र का निवारण                      -               तीन से पांच साल
प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्लान तैयार करना                  -               दो से तीन साल
कचरे का कैरेक्टराइजेशन करना                                     -               एक साल
यूसीआईएल  को मेमोरियल के रूप में विकसित करना       -                 दो से तीन साल
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