डॉ.एमएल छीपा

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय इस समय अपनी स्थापना के एक साल पूरे कर रहा है। बीते एक साल की उपलब्धियों से लेकर भविष्य की योजनाओं के बारे में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.एमएल छीपा ने एजुकेशन हेराल्ड से हुई चर्चा में कई बातें साक्षा की। पेश हैं चर्चा के प्रमुख अंश-
 
ईएच: अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय को अपनी स्थापना के पूरा एक साल हो गया है। बीते एक साल में विश्वविद्यालय की शुरूआती उपलब्धी क्या रही ?
 
एमएल छीपा: किसी भी विश्वविद्यालय के विकास के लिए महज एक साल काफी कम समय होता है। विश्वविद्यालय जैसी संस्था को विकास के लिए जरा लंबा समय चाहिए होता है। फिर भी शुरूआती समय में विश्वविद्यालय ने कुछ संगोष्ठियां आयोजित की हैं। इसका उद्देश्य केवल लोगों में विश्वविद्यालय के प्रति जागरुकता पैदा करना था। साथ ही शुरूआत में जो पाठ्यक्रम शुरू किए जाने हैं उनका सिलेबस भी तैयार किया गया है। इसके लिए बकायदा संगोष्ठियों का आयोजन कर विषय विशेषज्ञों के सुझाव लिए गए हैं। 
 
ईएच: हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इस दिशा में विश्वविद्यालय को शुरूआत में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ?
 
एमएल छीपा: हिन्दी भाषा वैसे तो काफी समृद्ध है। लेकिन इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, विज्ञान, मेडिकल आदि जैसे विषयों में हिन्दी की अच्छी किताबें नहीं है। शुरूआत में तो यही सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन इस समस्या को दूर करने के लिए अभी से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। देश भर से ऐसे विषय विशेषज्ञों को तलाशा जा रहा है जो हिन्दी में किताबें लिखने के लिए तैयार हैं। लेकिन परेशानी यह भी है कि ऐसे लोग मिल नहीं रहे हैं। इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, विज्ञान, मेडिकल जैसे विषयों के विशेषज्ञ हिन्दी में किताबें लिखना ही नहीं चाहते हैं। 
 
ईएच: तो इस परेशानी का हल निकालने के लिए हिन्दी विश्वविद्यालय  अपने स्तर पर क्या प्रयास कर रहा  है ?
 
एमएल छीपा: विश्वविद्यालय अपने स्तर पर इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, विज्ञान, मेडिकल जैसे विषयों की किताबें अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद कराने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा अब तक इन विषयों की हिन्दी में प्रकाशित हो चुकी किताबों को लाइब्रेरी के लिए खरीदने की भी तैयारी की जा रही है। हालांकि हमें पूरी उम्मीद है कि इन विषयों में हिन्दी में किताबें लिखने वाले विषय विशेषज्ञ जरूर मिलेंगे। 
 
ईएच: फिलहाल विश्वविद्यालय कौन-कौन से विभाग खोल चुका है व पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है ? 
 
एमएल छीपा: विश्वविद्यालय ने अब तक योग एवं मानव चेतना विकास, वनस्पति विज्ञान, गणित, हिन्दी व वाणिज्य विभाग खोल चुका है तथा इनमें योग शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, योग प्रशिक्षक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, योग चिकित्सा प्रशिक्षण, जैविक कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन, जैवविविधता एवं पर्यावरण प्रबंधन, जैविक कृषि प्रशिक्षण, वैदिक गणित, अनुवाद तथा कार्य संस्कृति संवर्धन जैसे पाठ्यक्र संचालित किए जा रहे हैं। यह पाठ्यक्रम 15 दिन से लेकर 6 माह तक की अवधि के हैं। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जबकि सत्र 2013-14  से चार संकायों में स्नातक, स्नातकोत्तर, एमफिल व पीएचडी तक के पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे। 
 
ईएच: विश्वविद्यालय ने स्नातक से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई कराने के लिए फिलहाल किन संकायों का चयन किया है ? 
 
एमएल छीपा: विश्वविद्यालय फिलहाल स्नातक व स्नाकोत्तर स्तर पर विज्ञान, कला, वाणिज्य, समाज विज्ञान व प्रबंध संकाय के कोर विषयों पर ही ध्यान केंद्रीत कर रहा है। स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में विज्ञान व समाज विज्ञान संकाय की पढ़ाई करायी जाएगी। वहीं एमफिल व पीएचडी के लिए भी इन्हीं संकायों के तहत आने वाले कोर समूह के विषयों को ही पढ़ाई के लिए चुना गया है। इसमें खास बात यह है कि विज्ञान के सभी विषयों में एमफिल व पीएचडी पूरी तरह हिन्दी भाषा में ही करायी जाएगी। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश जुलाई 2013 से शुरू हो जाएगा। 
 
ईएच: विश्वविद्यालय के विकास के लिए प्रदेश सरकार से क्या सुविधा मांगी गई है और इसके लिए बजट कितना निर्धारित किया गया है ? 
 
एमएल छीपा: विश्वविद्यालय के विकास के लिए प्रदेश सरकार ने हर संभव मदद का वादा किया है। शुरूआत में विश्वविद्यालय का बजट 400 करोड़ रुपए रखा गया है। इसके अलावा राज्य सरकार से शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक मिलाकर कुल 300 पद मांगे गए हैं। हालांकि सरकार ने अभी 27 शैक्षशिण व 35 गैर शैक्षणिक पद स्वीकृत किए हैं। इन पदों पर भर्ती होने तक विश्वविद्यालय प्रतिनियुक्ति से आए शिक्षकों व गैर शिक्षकों से ही काम चला रहा है। 
 
ईएच: विश्वविद्यालय का पूरी तरह संचालित होने में और कितना समय लग सकता है ?
 
एमएल छीपा: विश्वविद्यालय का पूरा सेटअप तैयार होने में कम से कम अभी और एक से दो साल लगेंगे। विश्वविद्यालय के लिए जमीन फाइनल होने व भवन बनने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। कक्षाएं संचालित करने के लिए विश्वविद्यालय किराए के भवन तलाश रहा है। शुरूआत में तो इतनी दिक्कतें आती ही हैं। 
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