हिन्दी में किताबों की कमी दूर करेगा हिन्दी विश्वविद्यालय

भोपाल। हिन्दी माध्यम में उच्च गुणवत्ता वाली किताबों की कमी जूझ रही उच्च शिक्षा की यह समस्या अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय  दूर करेगा। विवि ने विज्ञान, वाणिज्य से लेकर इंजीनियरिंग व मेडिकल विषयों की हिन्दी में किताबें प्रकाशित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
आगामी सत्र से पहले इस कमी को दूर करने के लिए विवि देश भर से इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक व शिक्षाविदों की मदद लेने जा रहा है। विवि की योजना विज्ञापन जारी कर किताब लिखने के लिए लेखकों को आमंत्रित करने की है। विज्ञापन में हिन्दी भाषी प्रदेशों के विषय विशेषज्ञों पर विशेष तौर से ध्यान केन्द्रित रहेगा। विज्ञान, इंजीनियरिंग व मेडिकल जैसे विषयों की हिन्दी माध्यम में किताबों की कमी को देखते हुए विवि फिलहाल डिप्लोमा कोर्स ही शुरू कर रहा है। विवि अगले साल से डिग्री कोर्स शुरू करेगा। किताब लिखने की शुरूआत स्नातक पाठ्यक्रमों से की जाएगी। धीरे-धीरे इसका दायरा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम तक बढ़ाया जाएगा। कुलपति डॉ.एमएल छीपा का कहना है कि केवल विज्ञान, इंजीनियरिंग व मेडिकल में ही नहीं बल्कि कला व वाणिज्य के कई विषयों में हिन्दी माध्यम में उच्च गुणवत्ता वाली किताबों की कमी है। इन विषयों में उच्च स्तरीय पढ़ाई के लिए अभी भी अंग्रेजी भाषा की किताबों पर ही निर्भरता बनी हुई है। कुलपति डॉ. छीपा का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण काम हिन्दी माध्यम में किताबें प्रकाशित करने से पहले छात्रों के बीच इनकी जरूरत व उपयोगिता पैदा करना हैं। यह काम किस तरह होगा इसके लिए भी शिक्षाविदों से राय ली जाएगी। गौरतलब है कि इस समय हिन्दी भाषा उच्च गुणवत्ता वाली किताबों का कमी से जूझ रही है।  ख़ासकर इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे विषयों में तो हिन्दी भाषा में किताबें ही नहीं है। 
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