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देश के शीर्ष संस्थानों में फैकल्टी की 50 प्रतिशत तक कमी

भोपाल। आज तकनीकी शिक्षा के विकास की गति बहुत तेज है। भारत को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के साथ एक नेतृत्व क्षमता का विकास करना होगा, जिससे वह एशिया पेसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सके। लेकिन फिलहाल देश में तकनीकी शिक्षा की स्थिति ठीक नहीं है।

देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में फैकल्टी की 50 प्रतिशत तक कमी है। अच्छे शिक्षक मिल नहीं रहे। इंजीनियरिंग स्नातक रोजगार प्राप्त करने की योग्य क्षमता नहीं रखते हैं। उच्च कोटी के शिक्षण संस्थान जब तक अनुसंधान की ओर नहीं बढ़ेंगे तब तक हम सिर्फ नकल ही करते रहेंगे।

यह कहना है राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान (एनआईटीटीटीआर) भोपाल के स्थापना दिवस समारोह में आयोजित संगोष्ठी में अपने विचार रखने वाले देश के विभिन्न संस्थानों से आए विषय विशेषज्ञों का। पिछले दो दिन एनआईटीटीटीआर भोपाल ने अपना 49  वां स्थापना दिवस समारोह मनाया।

इस दौरान 'रिवाइटालाइजिंग एनआईटीटीटीआर भोपाल @ 50 चैलेंजेस एंड प्रोस्पेक्ट" वषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। समारोह के पहले दिन आयोजित संगोष्ठी में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर देश के जाने माने चितंकों एवं विचारकों ने चर्चा की।

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के निदेशक प्रो. अजय खरे ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एनआईटीटीटीआर भोपाल की सकारात्मक पहल के अच्छे परिणाम आएंगे। संस्थान के निदेशक प्रो. विजय अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि स्थापना दिवस स्वर्णिम अतीत के गौरव से सीखते हुये भविष्य को संवारने हेतु प्रतिबद्धता का समय होता है। समाज की हमसे क्या अपेक्षाएं हैं, इसका मूल्यांकन करने का भी समय होता है।

इस अवसर पर यूनेस्को यूनीवॉक जर्मनी के महानिदेशक प्रो.श्यामल मजूमदार ने जर्मनी से भेजे अपने संदेश में कहा कि शिक्षक का दायित्व आज बड़ा हो गया है। शिक्षक को एक अच्छे प्रबंधक की तरह कार्य करना पड़ता है। एशिया के विभिन्न  तकनीकी शिक्षक व औद्योगिक संस्थानों के बीच एक बेहतर नेटवर्किंग की आवश्यकता है। भारत के सामने इस क्षेत्र में कई चुनौतियां है और उसे वैश्विक संदर्भ में सोचना होगा।

छत्तीसगढ़ तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीसी मल ने छत्तीसगढ़ राज्य में तकनीकी शिक्षा के क्रमिक विकास पर व्याख्यान दिया। एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ के प्रो. आर.सुब्रमण्यम ने कहा कि एनआईटीटीटीआर के नाम के साथ ट्रेनिंग और रिसर्च जुड़ा हुआ है। हमें दोनों के साथ न्याय करना है। देश में तकनीकी शिक्षकों व अच्छे कोर्स मटेरियल की कमी है। तकनीकी शिक्षा में रिसर्च, स्टूडेन्ट सेन्टर्ड, लर्निंग, एग्ज़ामिनेशन रिफार्म की जरूरत है।

प्रो.पीडी कुलकर्णी ने शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया जिससे क्वालिटी प्रोडक्ट तैयार हो सकें। वहीं समारोह के दूसरे दिन के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एमएन बुच ने कहा कि अच्छा शिक्षक वही है जो विद्यार्थी के  ज्ञानार्जन के स्तर पर जाकर पढ़ाये और उनके विचारों को सही दिशा दे पाये।

आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ.संतोष चौबे ने कहा कि देश में 92 प्रतिशत रोजगार असंगठित एवं 8 प्रतिशत रोजगार के अवसर संगठित क्षेत्र में है। हमें असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों के कौशल विकास पर ध्यान देना जरूरी है। आज ज्ञानार्जन के नए-नए स्त्रोत हमारे सामने है इसिलिए शिक्षक का दायित्व भी तेजी से परिवर्तित हुआ है। लैंग्वेज और कन्टेन्ट दोनों तकनीकी शिक्षा में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अत: भारतीय भाषाओं में टेक्नोलॉजी की पुस्तकें उपलब्ध होना चाहिए।  

 
 
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