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एमवीएम भोपाल में बन रही केमेस्ट्री की मॉडल लैब

भोपाल। शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) भोपाल में केमेस्ट्री की मॉडल लैबोरेटरी तैयार हो रही है। इसके बनने के बाद रिसर्च के लिए रिपोर्ट देश व विदेश में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अभी कॉलेज के केमेस्ट्री विभाग में जो रिसर्च होती है उसके विश्लेषण के लिए यौगिकों को चंडीगढ़, जम्मू, भेल, एम्प्री के साथ ही अमेरिका तक भेजना पड़ता है। लेकिन लैब में आधुनिक उपकरण लगने के बाद कॉलेज में ही रासायनिक यौगिकों का विश्लेषण किया जा सकेगा। साथ ही रिपोर्ट भी तत्काल मिलेगी।

एमवीएम में रासायन विभाग की प्रोफेसर डॉ. अलका प्रधान के अनुसार रासायनिक क्रिया की गति मापनी हो या कंपाउंड का पता लगाना हो। यह काम अब मिनटों में होगा। यही नहीं राजधानी के कॉलेजों में शोध कर रहे केमेस्ट्री विषय के शोधार्थियों को केमिकल कंपाउंड के विश्लेषण के लिए नहीं भटकना होगा।

पहली आधुनिक लैब होगी
डॉ. प्रधान ने बताया कि स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में कई ऐसे विषय आ गए हैं, जो सीधे रिसर्च वर्क से जुड़े हैं। इन विषयों में प्रयोग के लिए कॉलेज लैब में उपकरणों की कमी थी। एमवीएम में जो केमेस्ट्री की मॉडल लैब बन रही है वो संभवत: भोपाल ही नहीं बल्कि प्रदेश में सबसे ज्यादा आधुनिक होगी। इस लैब के लिए जो उपकरण मंगाए जा रहे हैं वो केवल एमवीएम में ही होंगे।

कंसलटेंसी की भी योजना
मॉडल लैब बनने के बाद कॉलेज का रसायन विभाग कंसलटेंसी भी शुरू करने की योजना बना रहा है, ताकि प्रयोग के साथ-साथ छात्र व शोधार्थी पैसे भी कमा सकें। अभी तक रासायनिक कंपाउंड की टेस्टिंग बाहर से करानी पड़ती है। इसमें काफी पैसा खर्च होता है, लेकिन लैब बनने के बाद रासायनिक कंपाउंड की टेस्टिंग कॉलेज में ही होगी और पैसा भी बचेगा।

ये उपकरण मंगाए
डॉ. प्रधान ने बताया कि लैब के लिए एआईटीआर, पेलियोग्राफ, हाईसेंसिटिव पेलियोग्राफ, स्पेक्ट्रोस्कोपी, अल्ट्रा वायलेट स्पेक्ट्रोस्कोपी, पीएच मीटर, कैलोरी मीटर, थर्मोस्टेट आदि जैसे आधुनिक उपकरण मंगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग ने एमवीएम की केमेस्ट्री लैब को आदर्श लैब बनाने के लिए चुना है। इसके लिए जनभागीदारी मद से अनुदान भी दिया है।


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