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वायु प्रदूषण के कारण, नुकसान और रोकथाम

वायु प्रदूषण के कारण हर साल करोड़ों रुपये मूल्य का खाद्यान्न नष्ट हो जाता है। अकेले अमेरिका में ही वायु प्रदूषण से 32 करोड़ 50 लाख से अधिक मूल्य का खाद्यान्न नष्ट होने की जानकारी है। आखिर वायु प्रदूषण होता क्या है ?
वायु प्रदूषण की परिभाषा के अनुसार 'वायु के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा कोई भी अवांछित परिवर्तन जिसके द्वारा स्वयं मनुष्य के  जीवन या अन्य जीवों, जीवन परिस्तिथियों, हमारे औद्योगिक प्रक्रमों तथा हमारी सांस्कृतिक सम्पत्ति को हानि पहुंचे या हमारी प्राकृतिक संपदा नष्ट हो या उसे हानि पहुंचे, वायु प्रदूषण कहलाता है।" 
दरअसल वायु सभी मनुष्यों, जीवों व वनस्पतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। मनुष्य बिना भोजन-पानी के कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है लेकिन हवा के बिना कुछ ही मिनट भी जीवित रहना मुश्किल है। वायु में 78% नाइट्रोजन, 21 %  ऑक्सीजन, 0.03 % कार्बन-डाय-आक्साइड एवं शेष निष्क्रिय गैस और जल वाष्प होती है।
वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में करीब 6 लाख अरब टन हवा है। एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति एक  दिन में 22 हजार बार श्वांस लेता है। लेकिन आज वायुमंडल में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हवा में कई हानिकारक गैसों की संख्या बढ़ते ही जा रही है। एक अनुमान के अनुसार पिछले सात दशकों में 10 लाख टन कोबाल्ट, 8 लाख टन निकिल तथा 6 लाख टन आर्सेनिक सहित अन्य गैसें वायुमंडल में समाविष्ट हो चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में स्थिति भयावह हो जाएगी। 

क्या हैं वायु प्रदूषण के स्त्रोत
वायु प्रदूषण के प्रमुख स्त्रोतों में प्राकृतिक व मानवीय स्त्रोत मुख्य रूप से शामिल हैं। प्राकृतिक स्त्रोत के तहत आंधी-तूफान के समय उड़ती धूल, ज्वालामुखियों से निकली हुई राख, कोहरा, वनों में लगी हुई आग से उत्पन्न् धुआं, वनों में पौधों से उत्पन्न् हाइड्रोजन के यौगिक एवं परागकण तथा दल-दल व अनूपों में अपघटित होते पदार्थों से निकली मीथेन गैस वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।
वहीं दूसरी ओर मानव स्त्रोत के तहत औद्योगिकीकरण, दहन प्रक्रिया (जैसे घरेलु कार्यों में दहन, वाहनों में दहन व ताप विद्युत ऊर्जा के लिए दहन), औद्योगिक निर्माण, आणविक ऊर्जा, कृषि कार्यों में कीटनाशकों का उपयोग व विलायकों के उपयोग, धूम्रपान आदि शामिल हैं। औद्योगिकीकरण के कारण वायुमंडल में कार्बन-डाय-आक्साइड, कार्बन-मोनो-आक्साइड, सल्फर-डाय-आक्साइड, हाइड्रो कार्बन, सीसा, क्लोरीन, अमोनिया, मैडमियम, बेंजीपाइस, धूलकण, रेडियो एक्टिव पदार्थ, आर्सेनिक, बेरिलियम आदि वायु को प्रदूषित करते हैं।
घरेलु कार्यों में दहन के तहत खाना पकाने व पानी गर्म करने में कोयला, लकड़ी, गोबल के कंडे, उपलों, मिट्टी का तेल आदि से जो ऊष्मा उपयोग की जाती है उससे  कार्बन-डाय-आक्साइड, कार्बन-मोनो-आक्साइड, सल्फर-डाय-आक्साइड आदि जैसी गैसें निकलती हैं। वहीं वाहनों में दहन प्रक्रिया के तहत मोटरकार, मोटर साइकिल, स्कूटर, ट्रक, बस, डीजल रेल इंजिन आदि जैसे साधनों में पेट्रोल व डीजल का उपयोग किया जाता है जो वायुमंडल में हाइड्रोकार्बन व नाइट्रोजन छोड़ते हैं। 

वायु प्रदूषण के प्रभाव
वायु प्रदूषण केवल मनुष्यों को ही नहीं बल्कि वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, जलवायु, मौसम, ऐतिहासिक इमारतों और यहां तक की ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाता है। वायु प्रदूषण के कारण मनुष्यों को दमा, गले का दर्द, निमोनिया, एम्फायसीमा, ब्रोंकाइटिस, सिरदर्द, उल्टी, फेफड़े का कैंसर, हृदय रोग, जुकाम, खांसी व आंखों में जलन आदि जैसी समस्या पैदा हो जाती है।
इसी तरह वायु प्रदूषण के कारण सूर्य के प्रकाश की मात्रा में कमी आती है जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है। वहीं वायु प्रदूषण के कारण जीव-जंतुओं का श्वसन तंत्र और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण के कारण ही जलवायु भी प्रभावित हो रही है।
पिछले कुछ सालों में जिस तरह जलवायु परिवर्तन हुआ है उससे बाढ़ और सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। यही नहीं मौसम पर भी वायु प्रदूषण का विपरीत प्रभाव पड़ा है। वायु प्रदूषण के कारण ही पृथ्वी को सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली ओजोन परत में छिद्र हो गया है। ऐतिहासिक इमारतें बुरी तरह प्रभावित हो रही है। 

वायु प्रदूषण रोकने के लिए एक्ट
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए भारत सरकार ने बकायदा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 लागू किया हुआ है। इस अधिनियम का उद्देश्य वायु प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण व उपशमन करना, अंतर्राष्ट्रीय बाध्यता को पूरा करना, औद्योगिक नगरों के बढ़ते हुए वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना, मानव तथा जीव जगत की प्रदूषित वायु से रक्षा करना, वायु की गुणवत्ता को बनाए रखना तथा जल (प्रदूषण निवारण नियंत्रण तथा उपशमन) अधिनियम 1974 के अधीन गठित केंद्रीय बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) का दायित्व सौंपना शामिल है। वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981  दिनांक 167 मई 1981 से लागू है।  
 
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