यहां उगने वाली सब्जियों में मिले यूरेनियम के अंश

भोपाल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में आने वाले सारणी के आसपास के गांव की मिट्टी, पानी से लेकर खेतों में उगने वाली सब्जियाँ व पेड़ पौधे तक जहरीले हो चुके हैं। मिट्टी, पानी व सब्जियों में आर्सेनिक, कैडमियम, कॉपर, क्रोमियम, जिंक, लैड, टिन आदि जैसे खनिज तत्वों की मात्रा मानक से अधिक मिली है। चिंता की बात यह है कि सब्जियों में यूरेनियम व थोरियम जैसे रेडियोधर्मी तत्वों के भी अंश मिले हैं।

यह खुलासा बरकतउल्ला विवि के भूविज्ञान विभाग द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययन में हुआ है। विभाग ने सारणी स्थित सतपुड़ा थर्मल पॉवर प्लांट के आसपास के खेतों से सब्जियों व पेड़ पौधों के करीब 27, विभिन्न जल स्त्रातों के 41 तथा मिट्टी के 8 सैंपल एकत्र कर अध्ययन किया है। यह सैंपल विश्लेषण के लिए पुणे यूनिवर्सिटी में भेजे गए थे। विश्लेषण के बाद जो रिपोर्ट आयी है वो होश उड़ाने वाली है। भूविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.डीसी गुप्ता व शोधार्थी हेमंत बिसानिया द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक सब्जियों में यूरेनियम की मात्रा 0.300 से लेकर 1.80 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) तथा थोरियम की मात्रा 0.800 से लेकर 4.300 पीपीएम तक मिली है। इनके अलावा बोहरियम,  रूबीडियम, सेलेनियम आदि जैसे अन्य रेडियोधर्मी तत्वों की भी मात्रा पायी गई है।

सब्जियों में जहर
अध्ययन के लिए सैंपल यह सारणी से लगे घोंसरी, धासेड़, बिक्रमपुर, पाथाखेड़ा, बदगांव, छत्तरपुर, कोलगांव व सलैया गांव से एकत्र किए गए थे। डॉ.गुप्ता के अनुसार पॉवर प्लांट के आसपास के खेतों से एकत्र करेला, लौकी, कठहल, भिण्डी, बरबटी जैसी सब्जियों व आम, पीपल आदि जैसे पेड़ों की पत्तियों के सैंपल के अध्ययन की जो रिपोर्ट आयी है उसके अनुसार इन सब्जियों व पौधों में आर्सेनिक, कैडमियम, कॉपर, क्रोमियम, सेलेनियम,  जिंक, लैड व टिन की मात्रा 0.2 से लेकिन 2.2 पीपीएम तक थी जो मानव शरीर के लिए निर्धारित मानक से कहीं थी।

लौकी में आर्सेनिक अधिक
करेला, लौकी, कठहल, भिण्डी में जहाँ  आर्सेनिक की मात्रा मध्यम उच्च  थी वहीं आम, पटस व नींबों के पत्तों में इसकी मात्रा उच्च स्तर पर मिली है। बैंगन सहित अन्य पौधों व सब्जियों के पत्तों में कॉपर की मात्रा 51.2 पीपीएम तक रिकार्ड की गई है। सेलेनियम की सबसे ज्यादा मात्रा 19.5 व 11.5 पीपीएम घासों व पटस के पत्तों में मिली है। जबकि जिंक की सबसे ज्यादा मात्रा सब्जियों के अलावा पीपल, सीताफल, जामुन, इमली व बैंगन की पत्तियों में मिली है।

जल स्त्रोत भी जहरीले
सब्जियों के अलावा इस इस क्षेत्र के जल स्त्रोत भी जहरीले हो गए हैं। अध्ययन के लिए जल स्त्रोतों के 41 सैंपल एकत्र किए गए थे। इनमें 27 कुंओं, 10 हैंडपंप व 4 सतही पानी के थे। यह सैंपल मानसून से पहले व मानसून के बाद एकत्र किए गए थे। डॉ.गुप्ता का कहना है कि मानव शरीर के  लिए लौह तत्व की मात्रा केवल 0.3 पीपीएम होनी चाहिए। लेकिन यहाँ के जल स्त्रोतों में लौह तत्व की मात्रा मानक से कहीं अधिक मिली है।

कैंसर की संभावना
डॉ.डीसी गुप्ता के अनुसार मानक से अधिक शरीर में जाने पर इन तत्वों के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है तथा साथ ही जेनेटिक्स डिसऑर्डर, क्रोमोसोम में बदलाव व विकलांग बच्चा पैदा होने की संभावना दोगुनी हो जाती है। गांव वालों ने भी सर्वे के दौरान पेट दर्द, सीने में जलन, सिर दर्द, श्वांस व लीवर में समस्या होना स्वीकारा था। डॉ.गुप्ता के मुताबिक इस समस्या की जड़ सतपुड़ा थर्मल पॉवर प्लांट से प्रतिदिन निकलने वाली 7 से 8 हजार मीट्रिक टन कोयले की राख है। यह राख मिट्टी, हवा, पानी व सब्जियों को जहरीला बना रही है।

1
Back to top